Monday, November 23, 2015

कला संस्कृति मंत्री शिवचंद्र राम से बातचीत

प्र.-नई सरकार विकास के दावे के साथ आयी है,क्या इस विकास में सांस्कृतिक विकास भी समाहित समझा जाय?
उ.-पूरी तरह से।हमारी विकास की अवधारणा बगैर संस्कृति के पूरी नहीं होती।आपने नीतीश सरकार का पिछला कार्यकाल भी देखा होगा,किस तरह समर्पित होकर संस्कृति के माध्यम से बिहार की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बुलंद करने की कोशिश की गई थी।इस बार हमारी कोशिश बिहार की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहुंचाने की होगी।जैसे पिछली सरकारों की प्राथमिकता में संस्कृति थी,उसी तरह इस सरकार की प्रथमिकता में भी संस्कृति रहेगी।
प्र.-क्या कुछ नई योजनाओं के साथ आगे बढेंगे आप?
उ.-योजनाएं तो राज्य के लोगों की जरुरतों के अनुरुप बनेगी।सास्कृतिक क्षेत्र में जो लोग सक्रिय हैं उनकी राय भी हम लेंगे।हमारी कोशिश सांस्कृतिक क्रियाकलापों को राजधानी के प्रेक्षागृहों से आगे गांवों तक ले जाने की होगी।गांवों में सक्रिय और प्रतिभावान कलाकारों की पहचान के लिए हम पंचायतों का भी सहयोग लेंगे।हमारी कोशिश होगी कि गांवों में लोकगाथाओं लोकगीतों का जो एक सांस्कृतिक वातावरण बिहार की पहचान था,वह फिर से सजीव हो सके।
प्र.-क्या सरकार के स्तर से इस जमीनी परिवर्तन की उम्मीद की जा सकती है?
उ.-क्यों नहीं,संस्कृति तो हरेक गांव में जीवित है,जरुरत उसे सहयोग देने की है।हम गांव के लोगों के साथ मिल कर सहयोग करेंगे।संस्कृति को विकसित करने के लिए सबसे आवश्यक लोगों का सहयोग है।हम सर्वप्रथम उसे हासिल करने की कोशिश करेंगे।वास्तव में लोग ही बिहार की संस्कृति के वाहक होंगे।
प्र.-संस्कृति को लेकर शुक्रगुलजार,शनिबहार,कलामंगल जैसे कार्यक्रम पिछली सरकार की उपलब्धियों में शामिल रहे हैं।आप क्या कुछ नया करना चाहेंगे?
उ.-पिछली सरकार ने जो भी बेहतर शुरुआत की है,मैं उसे और बेहतर और जनोन्मुख बनाने की कोशिश करुंगा,ताकि अधिक से अधिक हमारे कलाकार लाभान्वित हो सकें और राज्य की संस्कृति को उन्नत बनाने में अपना योगदान दे सकें।हमारे पास प्रेमचंद रंगशाला है,भारतीय नृत्य कला मंदिर की कलादीर्घा है,कन्सर्ट हॉल है हम सबों के अधिकाधिक उपयोग का वातावरण बनाएंगे।
प्र.भारतीय नृत्य कला मंदिर पूरी तरह जर्जर हो चुका है,उसका मुक्ताकाश मंच भी खस्ता हाल है,क्या आपके समय में उसके बेहतरी की उम्मीद की जा सकती है?
उ.-अवश्य। मैं शीघ्र स्वयं भारतीय नृत्य कला मंदिर का निरीक्षण कर उसकी स्थिती के बारे में प्रस्ताव लाउंगा।हमारी कोशिश होगी कि कालिदास रंगालय की तरह न्यूनतम शुल्क पर रंगकर्मियों और प्रदर्श कलाकारों हेतु एक प्रेक्षागृह वहां निर्मित की जा सके।मुक्ताकाश मंच को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की कोशिश करुंगा,ताकि बडे से बडे कलाकारों को भी प्रदर्शन के लिए बिहार में असुविधा न हो।
प्र.-कला संस्कृति एवं युवा विभाग जीवन के कई पक्षों को समेटता है,आपका फोकस किस पर रहेगा?
हमारी चिन्ता में प्रदर्श कला भी रहेगी,चाक्षुष कला भी,रंगमंच भी,खेल भी पुरातत्व और संग्रहालय भी।सभी एक दूसरे से जुडे हैं,और सभी को हम साथ लेकर चलेंगे।खेल के क्षेत्र में हमारी कोशिश होगी कि गांवों में स्कूलों और पंचायतों के माध्यम से खेल सुविधाओं का विस्तार कराया जा सके,ताकि सही प्रतिभा को अवसर मिल सके।
प्र.-युवाओं के साथ आपका सीधा संपर्क रहा है,आप किस तरह उनका सहयोग चाहेंगे?
उ.-हमारा निवेदन होगा युवा बिहार के बदलाव को पहचानें और जिस उत्साह से उसे स्वीकार किया है,उसे कायम रखें।बिहार आपके कंधों पर ही बढ सकता है.हमेशा अपने राज्य को अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करें।सरकार की ओर से मैं विश्वास दिला सकता हूं,वह हमेशा आपके साथ रहेगी।

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